भारत में इलेक्ट्रिक कारों की रफ़्तार: 2026 में टाटा आगे, महिंद्रा की ज़बरदस्त छलांग
जुलाई 2026 में भारत की इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 83 प्रतिशत बढ़ी। टाटा सबसे आगे, महिंद्रा तेज़ी से बढ़ती हुई, और सफारी EV जैसी बड़ी लॉन्च कतार में। एक संतुलित नज़र।
कारों की दुनिया पर नज़र रखने वाले किसी भी व्यक्ति की तरह, मैंने भी वर्षों तक सुना कि भारत में इलेक्ट्रिक कारें अभी दूर की बात हैं। लेकिन 2026 के आँकड़े देखकर मुझे मानना पड़ा कि वह भविष्य अब चुपचाप हमारे सामने आ खड़ा हुआ है, और उसकी रफ़्तार उम्मीद से कहीं ज़्यादा तेज़ है।
आँकड़े जो कहानी कहते हैं
जुलाई 2026 में भारत के इलेक्ट्रिक यात्री वाहन बाज़ार में कुल 32,036 इकाइयाँ बिकीं, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 83 प्रतिशत की ज़बरदस्त बढ़त है। इतनी ऊँची वृद्धि दर किसी सनक का नहीं, बल्कि एक गहरे और टिकाऊ बदलाव का संकेत देती है, जिसे अब नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है।
टाटा की मज़बूत बढ़त
इस दौड़ में टाटा मोटर्स सबसे आगे है। कंपनी ने जुलाई 2026 में 13,630 गाड़ियाँ पंजीकृत कराकर 42.5 प्रतिशत बाज़ार हिस्सेदारी हासिल की, जो एक साल पहले के 38.4 प्रतिशत से अधिक है। लगातार बढ़ती यह पकड़ बताती है कि टाटा ने आम खरीदार का भरोसा जीतने में अच्छी-खासी बढ़त बना ली है।
महिंद्रा की छलांग
दूसरी ओर महिंद्रा की रफ़्तार भी कम प्रभावशाली नहीं रही। कंपनी ने साल-दर-साल लगभग 125.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए अपनी दूसरी स्थिति और मज़बूत कर ली। जब दो बड़े घरेलू निर्माता इस तरह आपस में होड़ करते हैं, तो असली फ़ायदा अंततः हम ग्राहकों को ही मिलता है, बेहतर विकल्पों के रूप में।
कतार में बड़ी लॉन्च
आने वाले महीने और भी दिलचस्प लगते हैं। टाटा सफारी EV दिवाली 2026 के आसपास आने वाली है और इसे किसी मुख्यधारा ब्रांड की भारत की पहली पूरी तरह इलेक्ट्रिक सात-सीटर SUV बताया जा रहा है। वहीं महिंद्रा की XUV.e8, जो XUV700 का इलेक्ट्रिक रूप है, 80kWh बैटरी और लगभग 500 किलोमीटर से अधिक रेंज के साथ दिसंबर के आसपास दस्तक दे सकती है।
मेरी संतुलित राय
एक उत्साही होते हुए भी मैं सावधानी नहीं छोड़ता। चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी की लंबी उम्र और पुनर्विक्रय मूल्य जैसे सवाल अब भी बने हुए हैं, और इन्हें अनदेखा करना ठीक नहीं होगा। फिर भी 2026 का यह उछाल मुझे यह भरोसा देता है कि भारत में इलेक्ट्रिक कार अब अमीरों का शौक नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक विकल्प बनती जा रही है।





